सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण

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          भारत में सौर ऊर्जा बहुतायत में उपलब्ध है, सतत है और पर्यावरणीय अनुकूल है जिसमें ऊर्जा की आवश्यकताओं और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की कमी को पूरा करने की अत्यधिक क्षमता है। भारत सरकार के द्वारा सौर ऊर्जा उत्पादन करने के उद्देश्य से भारत में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन (जेएनएनएसएम) की स्थापना की गई। उपर्युक्त मिशन को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा, वर्ष 2010 में, राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (पूर्व में पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र) , चेन्नई के लिए एक मिशन माध्यम परियोजना के रूप में, पूर्ण भारत में विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन स्टेशनों के नेटवर्क की संस्थापना हेतु स्वीकृति प्रदान की गई। उपर्युक्त परियोजना इस दिशा में, सौर ऊर्जा परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन के लिए, निवेशक ग्रेड भूमि मापन, सौर ऊर्जा विकिरण आँकड़ों की शुद्ध उपलब्धता की कमी को दूर करने के लिए पूरे देश में सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन मूल्यांकन स्टेशनों की संथापना का कार्य करने की महत्वपूर्ण परियोजना है। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, चेन्नई के द्वारा इस परियोजना को दो चरणों में कार्यांवित किया गया है; प्रथम चरण में, अक्टूबर 2011 तक, 11 राज्यों और 1 संघ शासित प्रदेश में 51 सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन संस्थापित किए गए; द्वितीय चरण में, जून 2014 तक, 29 राज्यों और 3 संघ शासित प्रदेशों में 60 सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन और 4 उन्नत मापन स्टेशन (एएमएस) संस्थापित किए गए। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान, चेन्नई के द्वारा, महाराष्ट्र ऊर्जा विकास एजेंसी (एमईडीए), महाराष्ट्र सरकार के परामर्श माध्यम कार्यक्रम के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य में 6 सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन भी संस्थापित किए गए। सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण परियोजना में, उपर्युक्त के अतिरिक्त, सौर ऊर्जा संयंत्र की योजना और कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा और मौसम संबंधी आँकड़ों के संग्रह और विश्लेषण, सौर ऊर्जा विकिरण, आँकड़ा संसाधन, आँकड़ों की गुणवत्ता, मॉडलिंग और देश में सौर ऊर्जा एटलस निर्माण करने, निर्धारण आदि की परिकल्पना की गई है।

          सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण के विशेष स्टेशन में 1.5 मीटर और 6 मीटर ऊँचे दो टॉवर होते हैं; 1.5 मीटर ऊँचे टॉवर में क्रमशः एक सौर ऊर्जा ट्रैकर, एक पाइरेलियोमीटर और दो पायरोमीटर, एक छायांकन डिस्क सहित, प्रत्यक्ष मापन, वैश्विक और प्रसारित विरोधाभास मापन की सुविधा युक्त संयंत्र होते हैं। 6 मीटर ऊँचे टॉवर में क्रमशः परिवेश तापमान, सापेक्ष आर्द्रता, वायुमंडलीय दबाव, हवा की गति और दिशा, बारिश गिरने और एक अत्याधुनिक आँकड़ा अधिग्रहण प्रणाली मापने के लिए मौसम विज्ञान सेंसर संयंत्र होते हैं। सौर ऊर्जा सेंसर विश्व विकिरण केंद्र / विश्व रेडियोमेट्रिक संदर्भ (डब्लूआरसी / डब्लूआरआर) के लिए पता लगाने योग्य संयंत्र होते हैं; और मौसम विज्ञान सेंसर क्रमशः विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) के लिए भी पता लगाने योग्य संयंत्र होते हैं। सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन स्वतंत्र संचालन के लिए सौर ऊर्जा द्वारा संचालित होते है, और इसमें एक सप्ताह के लिए विद्युत स्वायत्तता होती है। दैनिक आधार पर स्टेशन की साफ - सफाई की स्थिति आदि को देखने हेतु एक ट्रिगर स्विच भी इस सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन में संस्थापित किया गया है। सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन का आँकड़ा, प्रति सेकंड नमूना होता है और एक मिनट से अधिक औसत का होता है; और जीपीआरएस प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रत्येक मिनट में राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान में स्थापित केंद्रीय रिसीविंग स्टेशन (सीआरएस) को प्रेषित करता रहता है।

           राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण एकक के द्वारा, उन्नत मापन स्टेशन (एएमएस), वायुमंडल में एयरोसोल की उपस्थिति और पृथ्वी की प्रतिबिंबिता (अल्बेडो) में आने वाली लंबी सौर ऊर्जा तरंग विकिरण और अनुसंधान एवं विकास की गतिविधियों के लिए वायुमंडलीय दृश्यता के मापन के कारण एएमएस सौर ऊर्जा विकिरण के क्षीणन की मात्रा के लिए, उन्नत मापन स्टेशन (एएमएस) , संस्थापित किए गए हैं। उपर्युक्त कार्यांवयन के अंतर्गत 4 उन्नत मापन स्टेशन (एएमएस) , राष्ट्रीय ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई), गुरुग्राम, भारतीय विज्ञान संस्थान और प्रौद्योगिकी संस्थान (IIEST) - हावड़ा, पंडित दीनदयाल पेट्रोलियम विश्वविद्यालय (पीडीपीयू), गांधी नगर और प्रत्युशा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (पीआईटीएएम) तिरुवल्लूर, में संस्थापित किए गए हैं। उपर्युक्त परियोजना में जीआईजेड, जर्मनी के द्वारा गुणवत्ता मापन , जाँच, रिपोर्ट निर्माण और भारत के सौर ऊर्जा एटलस पर उच्च गुणवत्ता वाले मानकों को प्राप्त करने और उच्च स्तर बनाए रखने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है। सौर ऊर्जा विकिरण आँकड़ों पर लागू गुणवत्ता नियंत्रण विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) द्वारा बेसलाइन सतह विकिरण नेटवर्क (बीएसआरएन) नियमों पर आधारित है, इसका विस्तार सौर ऊर्जा संसाधन ज्ञान (मेसोर) के प्रबंधन और पूर्वेक्षण द्वारा किया जा रहा है।

          राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के द्वारा दिनांक 03 जून 2015 को 3 किलोमीटर से 3 किलोमीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन के साथ भारतीय सौर ऊर्जा विकिरण एटलस का विमोचन किया गया , जो किसी भी स्थान पर सौर ऊर्जा संसाधनों का विवरण प्रदान करता है। वर्तमान में जीएचआई, डीएनआई और डीएचआई के वार्षिक औसत मूल्य 3 किलोमीटर से 3 किलोमीटर के ग्रिड से संबंधित प्रशासनिक विवरण के साथ प्रदान किए जाते हैं। 1 से 3 वर्ष की गुणवत्ता वाले भूमि मापन और सौर ऊर्जा आँकड़ों का उपयोग भौगोलिक समायोजन और मेटीओसेट -5 और मेटीओसेट -7 से दीर्घकालिक (1 999-2014) आँकड़ों के सत्यापन के लिए किया जाता है।

राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान -नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय सौर ऊर्जा पर ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ
भारतीय सौर ऊर्जा विकिरण एटलस
सह-समन्वय के साथ सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशनों की सूची
सौर ऊर्जा विकिरण संसाधन निर्धारण स्टेशन
वाणिज्यिक माध्यम के अंतर्गत सौर ऊर्जा उपकरणों का अंशांकन
अंशांकन मांग पत्र
चित्र दीर्घा
दृश्य-श्रव्य ( एवी) प्रस्तुति