पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन पर प्रौफेसर अण्‍णा मणि जन्‍मशती समारोह अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन

मुख्‍य पृष्‍ठ - पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन पर प्रौफेसर अण्‍णा मणि जन्‍मशती समारोह अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन

पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन पर प्रौफेसर अण्‍णा मणि जन्‍मशती समारोह अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन
13 दिसंबर & 14 दिसंबर 2019
ब्रोशर
पंजीकरण प्रपत्र
परिचय

पवन एवं सौर ऊर्जा वैश्‍व‍िक ऊर्जा मिश्रण के एक अभिन्‍न अंग बन गए हैं। देश में जुलाई 2019 तक 1GW (लगभग) ऑफ ग्रिड कनेक्‍ट किए गए सौर पवर संयंत्रों के साथ ग्रिड से कनेक्‍ट किए गए पवन एवं सौर उत्‍पादन की 66.8GW क्षमता उपलब्‍ध है। देश में पवन एवं सौर ऊर्जा के संस्‍थापन को गति प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2022 के लिए पवन से 60 GW एवं सौर से 100 GW का लक्ष्‍य निर्धारित किया है तथा वर्ष 2030 तक कम से कम 40% नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। पवन एवं सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए संसाधन मूल्‍यांकन अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण तत्‍व है।

सत्‍तरवीं दशक से संसाधन मूल्‍यांकन की यात्रा पवन एवं सौर समुदाय के विज़न एवं अथक प्रयासों से चला था। देश में पवन एवं सौर संसाधन क्षमता का मापन एवं मूल्‍यांकन प्रथम स्‍वाभाविक कदम बन गया तथा नवीकरणीय क्षेत्र में ही उसकी प्राकृतिक वृद्धि देखी जा सकती है।

जब भारत सरकार ने देश में पूर्व में पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केन्‍द्र (सीवेट) के नाम से प्रचलित वर्तमान में राष्‍ट्रीय पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी संस्‍थान (नीवे) को पवन एवं सौर, दोनों के संसाधन मूल्‍यांकन का कार्य सौंपा तो संसाधन मूल्‍यांकन के क्षेत्र में ठोस प्रयास की यात्रा में वृद्धि होते हुए दिखाई देती है।

नीवे ने वर्ष 2000 में पवन संसाधान मूल्‍यांकन कार्यक्रम प्रारंभ किया तथा वर्ष 2011 में सौर कार्यक्रम। एक ही समय में निजी क्षेत्र एवं राज्‍य नोडल एजेन्सी, दोनों के सक्रिय भागीदारी से ही संसाधन मापन के कार्य की दिशा में कई प्रयास किए गए। सभी पणधारियों द्वारा उक्‍त समेकित प्रयासों ने एक मज़बू नींव की स्‍थापना की जिसपर आज पवन क्षेत्र का विकास होते हुए दिखाई देता है और आज उसका स्‍वरूप हमारे समक्ष है।

वर्ष 2004 को 50m हब ऊंचाइ्र के लिए प्रथम पवन मानचित्र तैयार किया गया और उसे प्रकाशित किया गया। वर्ष 2010 में नीवे ने उन्‍नत तकनीकों से युक्‍त 50m, 80m हब ऊंचाई पर पवन मानचित्रावली तैयार किया है तथा देश में क्रमश: 49 GW और 102 GW का आकलन किया गया है। जैसे जैसे टरबाइन की हब ऊंचाई में बढ़ोतरी होती है नीवे ने सितंबर 2015 में 302 GW की आकलित क्षमता युक्‍त 100 GW पवन मानचित्रावली जारी की है और कुछ ही समय में 120m मानचित्रावली का लोकार्पण किया जाएगा। अत्‍याधुनिक तकनीक के साथ 150m ऊंचाई की मानचित्रावली का कार्य प्रक्रियाधीन है।

तथापि, प्रोफेसर डॉ. अण्‍णा मोडयिल मणि ने सर्वप्रथम संसाधन मूल्‍यांकन का कार्य शुरू किया था तथा उन्‍होंने एक पथ प्रदर्शक का कदम बढ़ाते हुए संपूर्ण भारत में पवन एवं सौर संसाधन क्षमता के मापन एवं मूल्‍यांकन कार्य का शभारंभ किया।

प्रोफेसर डॉ. अण्‍णा मणि की जन्‍मशती मनाने और उन्‍हें श्रद्धांजलि देने के लिए 23 अगस्‍त 2019 को पवन संसाधन दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन

भारत में मौसमविज्ञान के क्षेत्र में पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन कार्यों का योगदान वर्ष 1970 से हुआ। भारत सरकार ने वास्‍तविक मापनों के साथ क्षमता का मूल्‍यांकन करने के लिए वष 1985 में राष्‍ट्रीय पवन संसाधन मूल्‍यांकन कार्यक्रम का शुभारंभ किया जिसमें प्रोफेसर डॉ. अण्‍णा मणि ने एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा की। उक्‍त कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान में 896 पवन अनुवीक्षण स्‍टेशन स्‍थापित किए गए। आगे, जून 2008 में एमएनआरई द्वारा जारी ‘’निजी क्षेत्र द्वारा मापन’’ की मेहरबानी से देश में लगभग 1100 निजी पवन अनुवीक्षण स्‍टेशन भी स्‍थापित किए गए। भारत में लगभग 2000 पवन अनुवीक्षण स्‍टेशनों के लिए डेटा बैंक है जो विश्‍व का सबसे बृहत् माना जाता है।

प्रोफेसर डॉ. अण्‍णा मणि ने वर्ष 1980 में भारत के लिए सौर विकिरण डेटा हैण्‍डबुक प्रकाशित किया तथा वर्ष 1981 में भारत पर सौर विकिरण पर पुस्‍तक प्रकाशित किया तथा वर्ष 1990 में I से V खण्‍डों में भारत में पवन संसाधन सर्वेक्षण पर पुस्‍तक प्रकाशित किया। नीवे ने अपने मापन अभियान द्वारा शेष खण्‍ड VI से खण्‍ड IX तक के खण्‍डों का प्रकाशन जारी रखा।

इन मापनों एवं सवेक्षण खण्‍डों ने देश की क्षमता आकलन में अपनी सटीक परिभाषा के साथ अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया।

देश में वर्ष 2010 तक सौर विक‍िरण डेटा, इन्‍वेस्‍टर ग्रेड ग्राऊण्‍ड मापित सौर डेटा के विश्‍वसनीय डेटा उपलब्‍ध न होने के कारण अत्‍यंत चुनौतीपूर्ण था। देश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यान्‍वयन में एक बहुत बड़ा रोडा था। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए एमएनआरई ने वर्ष 2010 में वैश्‍विक समांनतर किरणन (GHI), सीधा सामान्‍य किरणन (DNI), फैलाव समानांतर किरणन (DHI) को मापकर सौर विकिरण संसाधन डेटा इकत्रित करने के लिए राष्‍ट्रीय कार्यक्रम का लोकार्पण किया तथा SRRA नामक विशिष्‍ट परियोजना को संस्‍थापति करने नीवे के माध्‍यम से फेज्‍़ड तौर पर मौसमविज्ञानी प्राचलों को शामिल किया। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 115 स्‍टेशनों को संस्‍थापित किया गया और इन SRRA स्‍टेशनों के अंतर्गत देश में 4 अत्‍याधुनिक मापन स्‍टेशनों को संस्‍थापित किया गया ताकि विभिन्‍न वातावरणिक तत्‍वों के कारण सौर विकिरण से संबंध‍ित स्‍थल क्षीणता डेटा इकत्रित की जा सके तथा उक्‍त 4 स्‍टेशन, प्रसिद्ध विश्‍व मौसम विज्ञान संगठन के विश्‍व मौसम अनुसंधान कार्यक्रम (WCRP) का एक भाग BSRN (आधार रेखा सौर विकिरण नेटवर्क) के अंतर्गत हैं। ऐशिया के दो देश, भारत और जापान इस प्रतिष्ठित नेटवर्क के एक भाग हैं।

सम्‍मेलन का विषय-वस्‍तु
  1. संसाधन मूल्‍यांकन के लिए मापन तकनीकों में आधुनिकताएं
  2. संसाधन मूलयांकन के लिए टूल और तकनीक
  3. संसाधनों के कालगत एवं स्‍थानिक भिन्‍नताएं
  4. संसाधन प्रतिचित्रण
  5. अनिश्चितताओं का प्रमात्रण
  6. अपतट पवन मूल्‍यांकन
सम्‍मेलन का लक्ष्‍य

प्रोफेसर डॉ. अण्‍णा मणि हमेशा पवन एवं सौर मापन अभियान के साथ-साथ संसाधन क्षमता के मूल्‍यांकन प्रक्रण को कार्यान्वित करते समय होनेवाली समस्‍याओं का समाधान करने के लिए प्रौद्योगिकीय महमत्‍वपूर्ण खोज, उत्‍पादों की खोज एवं तकनीकी समाधानों की खोज करती रहती थीं।

उनके इस प्रेरणा को बनाए रखते हुए सम्‍मेलन का विषय-वस्‍तु, मापन के क्षेत्र एवं संसाधन मूल्‍यांकन के क्षेत्र में होनेवाले अद्यतन प्रौद्योगिकीय विकास पर केन्द्रित होगा। सम्‍मेलन, राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय देशों का मिलन; इस क्षेत्र में कार्यरत सभी व्‍यावसायिकों के विचार, नेतृत्‍व, अभियंताओं के लिए एक मंच होगा। यह सम्‍मेलन, आइडिया, शिक्षण, तकनीकी विकासों के विनिमय के लिए एक खुला मंच होगा जिसमें सभी पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन (WSRA) में अपने अनुभवों का साझा करेंगे ताकि वे अगले स्‍तर में प्रचालनात्‍मक विशेषज्ञता के साथ आगे बढ़ सकें।

आमंत्रित वक्‍ता

सम्‍मेलन के लिए वक्‍ता, विश्‍वस्‍तरीय पवन एवं सौर उद्योग के क्षेत्र में कार्यरत राष्‍ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रसिद्ध विशेषज्ञ होंगे जिन्‍होंने पवन एवं सौर संसाधन मूल्‍यांकन विकास के क्षेत्र में अपना महत्‍वपूर्ण योगदान दिया है।

महमत्‍वपूर्ण तारीख
सम्‍मेलन के तारीख 13 एवं 14 दिसंबर 2019
पंजीकरण हेतु अंतिम तारीख : 30 नवंबर 2019
पुष्‍टीकरण की तारीख : 5 दिसंबर 2019
स्‍थल

सागर संगमम, सम्‍मेलन कक्ष, राष्‍ट्रीय समुद्री विज्ञान प्रौद्योगिकी संस्‍थान (NIOT) वेलचेरी ताम्‍बरम मुख्‍य मार्ग, पल्‍ल‍िकरणै, चेन्‍नई - 600100

उत्‍पाद एवं सेवाओं की प्रदर्शनी

सम्‍मेलन, संपूर्ण पवन एवं सौर उद्योग में कार्यरत व्‍यवसायिक एवं पणधारियों के लिए उत्‍पाद एवं सेवाओं को प्रदर्शित करने के लिए मौका प्रदान करता है। जिन व्‍यक्तियों को प्रदर्शनी के लिए जगह की आवश्‍यकता है, वे बुकिंग फॉर्म तथा शर्त एवं प्रतिबंधों के लिए सम्‍मेलन संयोजकों से संपर्क करें। बुकिंग, 30 नवंबर 2019 तक के लिए खुला रहेगा।

लक्ष्‍य प्रतिभागी
  • उद्योग कार्मिक
  • मोसम विज्ञानी
  • उद्यमी
  • नवोन्‍मेषक
  • संकाय सदस्‍य
  • अनुसंधान अध्‍येता/ विद्यार्थी
  • वैज्ञानिक एवं अभियंता
भाषा

सम्‍मेलन में अंग्रेजी राजभाषा होगी

पंजीकरण प्रक्रिया

पंजीकरण प्रपत्रों को अंतिम तारीख 30 नवंबर 2019 तक प्रस्‍तुत किया जाना चाहिए। कृपया अपने नामांकन/ प्रतिभागी विवरणों को wsraconference@gmail.com ईमेल पर भेजें। पंजीकरण प्रपत्र को नीवे वेबसाइट (http://niwe.res.in) से डाऊनलोड किया जा सकता है।

प्रतिभागिता मुफ्त है तथा कोई पंजीकरण शुल्‍क नहीं है। अत: संबंधित प्रत्‍यायकों के आधार पर पंजीकृत प्रतिभागियों की जांच की जाएगी।

सम्‍मेलन प्रायोजित करने के मौके

सम्‍मेलन, प्‍लेटिनम, हीरक, स्‍वर्ध एवं रजत प्रायोजन के मौके प्रदान करता है। दिलचस्‍पी रखनेवाली कंपनियां सम्‍मेलन निदेशकों से संपर्क कर सकते हैं।

प्‍लेटिनमहीरकस्‍वर्णरजत
5,00,000/- INR3,00,000/- INR2,00,000/- INR1,00,000/- INR
सम्‍मेलन निदेशक :

के भूपति
निदेशक एवं प्रभागाध्‍यक्ष
विश्‍लेषक, पूर्वानुमान एवं सौर विक‍िरण संसाधन मूल्‍यांकन (R&D, RDAF & SRRA) प्रभाग, नीवे
boopathi.niwe@nic.in
दूरभाष :+91-44-2246 3993
+91-9445798004

डॉ. पी कनगवेल
निदेशक एवं प्रभागाध्‍यक्ष
कौशल विकास एवं प्रशिक्षण (SDT) प्रभाग, नीवे
pkanagavel.niwe@nic.in
दूरभाष: +91-44-2246 3994
+91-9445798007