100 मीटर भूमि स्तह से ऊपर (एजीएल) संभावित पवन ऊर्जा – विद्युत

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भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मार्गदर्शन और निर्देशानुसार राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के द्वारा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए 100 मीटर हब ऊंचाई पर, पूर्ण भारत में भौगोलिक दृष्टि पर आधारित भूमि का और पवन ऊर्जा के प्रामाणिक नवीनतम उपलब्ध आँकड़ों के साथ-साथ भारत की पवन ऊर्जा क्षमता का आकलन किया गया। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित वर्ष 2022 तक 60,000 मेगावॉट पवन ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नीति निर्धारकों, निजी हितधारकों, सरकारी एजेंसियों और उद्योग जगत के अन्य हितधारकों के लिए यह जानकारी आवश्यक है। राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान (पूर्व में पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्र) के द्वारा, RISO-DTU डेनमार्क के सहयोग से, पूर्व में ही संभावित अनुमानित अध्ययन निष्पादन कार्य किया गया; जिसके द्वारा मेसो-स्केल व्युत्पन्न पवन ऊर्जा मानचित्रों और सूक्ष्म-मापन को प्रमाणित किया गया और 50 मीटर ऊँचाई हेतु भारतीय पवन ऊर्जा एटलस ज़ारी की गई, और अप्रैल 2010 में 80 मीटर हब ऊंचाई पर 5 किमी रिज़ॉल्यूशन सूचक के साथ कार्य किया गया।

भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मार्गदर्शन और निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान के द्वारा उन्नत मॉडलिंग तकनीकों का चयन किया गया और यथार्थवादी एवं व्यावहारिक धारणाओं के साथ इस अध्ययन की पुनरीक्षा की गई और 302 मीटर गीगावॉट के रूप में 100 मीटर ऊंचाई पर पवन ऊर्जा क्षमता का अनुमान लगाया गया। वर्तमान संभावित मूल्यांकन उन्नत मेसो-माइक्रो युग्मित संख्यात्मक पवन ऊर्जा प्रवाह मॉडल का उपयोग करते हुए 500 मीटर के स्थानिक रिज़ोल्यूशन (5 किलोमीटर पर 10 गुना से अधिक), अपनी तरह का प्रथम, पूर्ण भारत में लगभग 1300 वास्तविक मापन की पुष्टि सहित, कार्य किया गया। उपर्युक्त के अतिरिक्त, एनआरएससी 56 मीटर रिज़ॉल्यूशन भूमि का उपयोग / मापन करते हुए अध्ययन किया गया (एलयूएलसी) आँकड़ा (एडब्ल्यूआईएफएस) 1: 250 K स्केल और 6 मेगावॉट / वर्ग किलोमीटर वास्तविक भूमि उपलब्धता अनुमान के साथ किया गया। भूमि सुविधाएं जो पवन ऊर्जा टरबाइन क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं हैं उन्हें संभावित बफर / सेट-ऑफ के साथ संभावित मानचित्र से बाहर रखा गया है; इसके अतिरिक्त, सड़कों, रेलवे, संरक्षित क्षेत्रों, हवाई अड्डों आदि जैसे अन्य विकास आदि के क्षेत्रों को भी मानचित्र से बाहर रखा गया है। 1500 मीटर से अधिक ऊंचाई और 20 डिग्री से अधिक ढलान वाले भूमि क्षेत्रों को भी मानचित्र से बाहर रखा गया है। उपयुक्त भूमि सुविधाओं को 3 श्रेणीयों में विभाजित किया गया है (श्रेणी-I: बंजर भूमि, श्रेणी-II: खेती योग्य भूमि, और श्रेणी-III: वन भूमि) और श्रेणी-I में 80 प्रतिशत का काफी भार, श्रेणी-II में 30 प्रतिशत और श्रेणी -III में 5 प्रतिशत अनुमान के लिए माना गया है। मानचित्र क्षमता उपयोग फैक्टर (प्रतिशत सीयूएफ) पैमाने में तैयार किया गया है और 20 प्रतिशत से अधिक प्रतिशत सीयूएफ पर संभावित अनुमान के लिए विचार किया गया है।

क्रम संख्या राज्य / संघ शासित प्रदेश श्रेणी-I * श्रेणी-II * श्रेणी-III * कुल
1 अंडमान और निकोबार4.12 3.430.88 8.43
2 आंध्र प्रदेश22525.50 20538.101165.00 44228.60
3 छत्तीसगढ़3.24 57.0316.31 76.59
4 गोवा0.00 0.080.76 0.84
5 गुजरात52287.59 32037.83105.09 84431.33
6 कर्नाटक15202.36 39802.59852.40 55857.36
7 केरल332.63 1102.56264.38 1699.56
8 लक्षद्वीप3.50 3.400.77 7.67
9 मध्य प्रदेश2216.39 8258.558.93 10483.88
10 महाराष्ट्र31154.76 13747.43492.15 45394.34
11 ओडिशा1666.201267.06 160.223093.47
12 पुडुचेरी69.43 79.004.40 152.83
13 राजस्थान15414.91 3342.6212.96 18770.49
14 तमिलनाडु11251.48 22153.34394.82 33799.65
15 तेलंगाना887.43 3347.529.34 4244.29
16 पश्चिम बंगाल0.03 2.040.01 2.08
कुल मेगावॉट 153019.59145742.59 3489.31 302251.49
कुल गीगावॉट 153 146 3 302

* श्रेणी-I :- एनआरएससी स्तर -2 वर्गीकरण मान: 12, 13, 15, 1 9
  * श्रेणी-II :- एनआरएससी स्तर -2 वर्गीकरण मान: 2, 3, 4, 5, 6, 10, 18
 * श्रेणी-III :- एनआरएससी स्तर -2 वर्गीकरण मान: 7, 8, 9

अस्वीकरण

यद्यपि उपर्युक्त पुनर्मूल्यांकन अध्ययन में उन्नत मॉडलिंग तकनीक और प्रामाणिक आँकड़ा – संसाधनों का उपयोग किया गया है, तथापि मॉडलिंग प्रकृति और रिज़ोल्यूशन के कारण स्थानीय स्तर पर प्रवाह पैटर्न सभी स्थानों पर ठीक से पूर्वानुमान करने में असमर्थ रहा है। उपर्युक्त कारणों से, अलग-अलग राज्यों में अनुमानित क्षमता में साधारण परिवर्तन (ऊपर / नीचे) की संभावना है और जिन राज्यों का ऊपर उल्लेख नहीं किया गया है, उनमें मेगावॉट पैमाने में भी क्षमता हो सकती है। अध्ययन करते समय , मॉडलिंग सीमाओं को समझने की क्षमता पर, विचार करने की आशा की जाती है।